International Women's Day: हर महीने 5 दिन समाज करता है इनका 'बहिष्कार', क्योंकि ये नारी हैं!

राजनांदगांव. 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) पर हर ओर महिलाओं का सम्मान और उनकी कामयाबी की खबरें देखने, सुनने और पढ़ने मिल जाएंगी, लेकिन इसी समाज में ऐसी जगहें भी हैं, जहां हर महीने 5 से 7 दिन महिलाओं का बहिष्कार कर दिया जाता है. बहिष्कार के पीछे कारण एक ही है कि वो नारी हैं. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में सीतापुर पंचायत में एक ऐसा ही इलाका है, जहां इस वैज्ञानिक युग में भी रूढ़िवादी परंपरा बरकरार है. महिलाओं और लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान 5 से 7 दिन गांव के बाहर रहना पड़ता है.

हाल ही में राजनांदगांव जिला प्रशासन अपने पूरे अमले के साथ पहुंचा मानपुर ब्लॉक के सीतागांव पहुंचा. यहां उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करने की कोशिश की. जिला मुख्यालय से 120 किलोमीटर दूर वनांचल क्षेत्र मानपुर ब्लॉक के सीतागांव की महिलाएं और युवतियां पीरिएड (महावारी) के दौरान गांव से बाहर गन्दी और बदबूदार कुटिया में 5 से 7 दिन बीताती हैं. भोजन भी परिजन उसी कुटिया में पहुंचा देते है, जहां महिलाएं और युवतियां पीरिएड के दौरान रहती हैं. कुटिया के आसपास मवेशियों और सुअरों का डेरा रहता है, गांव का गंदा पानी भी उसी कुटिया का पास इकट्ठा होता है, जिस समय महिलाओं और युवतियों को स्वच्छ वातावरण की आवश्यकता होती है.

 

देवता होते हैं नाराज

रूढ़िवादी परम्परा के चलते इस गांव की महिलाओं और युवतियों को इस परम्परा के आगे नतमस्तक होना पड़ रहा है. गांव की रहने वाली कौशल्या कहती हैं कि पीरिएड के दौरान घर में रहने से देवी-देवता नाराज हो जाते हैं. गांव के पटेल दुर्गाराम का कहना है कि ये तो परम्परा है. इसे बंद नही किया जा सकता, लेकिन प्रशासन इस कुटिया की जगह एक पक्का कमरा बनवा दे, जिसमें लाइट, पानी की सुचारू व्यवस्था हो.

शिविर लगाया गया

शिविर में पहुंचे महिला बाल विकास की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रेवती व कमला ने बताया कि गांव के लोग इस प्रथा को बंद नही करना चाहते है. दो साल पहले तात्कालीन कलेक्टर द्वारा इस रूढ़िवादी प्रथा का खत्म करने के लिए अभियान चलाया गया था, जिसकी जिम्मेदारी महिला बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग को दी गई थी. महिला बाल विकास विभाग द्वारा महिलाओं और युवतियों को फ्री में सेनेटरी नेपकिन देना था, लेकिन महज 2 महीने ही तक ही दोनों विभागों ने क्षेत्र में कार्य किया, फिर बन्द कर दिया. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बताया गया कि दो माह तक ही सेनेटरी नेपकिन फ्री में दिया गया, फिर 15 से 20 रुपयों में बेचा जाने लगा. क्षेत्र की महिलाओं में इतना सामर्थ नही है कि ये लोग सेनेटरी नेपकिन खरीद सकें.ये भी पढ़ें: